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Showing posts from August 30, 2026

हमने बहुत पहले हाथ हिला दिया था -दिमित्री प्सुर्त्सेव

हमने बहुत पहले हाथ हिला दिया था दिमित्री प्सुर्त्सेव  हमने बहुत पहले हाथ हिला दिया था। तो फिर क्यों  जो नहीं हैं यहाँ  फ़िर भी वहाँ से किसे हाथ हिला रहे हैं?.. बुआई का समय  पास आ रहा है और खेत बीजों की प्रतीक्षा में हैं— जैसे हवा घासपात की प्रतीक्षा करती है, लहराती हुई उसे अर्थपूर्ण ढंग से …जैसे जर्जर छतें हमारी प्रतीक्षा करती रहीं। हमने हाथ हिलाये उन दूरियों तक जो धरती के किनारे के पार तक उड़ गए; और हम हम खड़े रहे पकी हवा के बीच जो यहीं जन्मी है और यहीं भटकती रहती है— जब तक शब्द  मेरी उस चिड़िया-सी ज़बान पर जो पुदीने से सुन्न हो गई है, गूंगी हो जाये हैं  और हमारे महान सपने मिल जाते हैं मिट्टी में । अंग्रेज़ी अनुवाद: Philip Metres हिंदी अनुवाद: नरेन्द्र हसन काशवी  Philip Metres के अंग्रेजी अनुवाद का रूसी शब्दों की सहायता और संदर्भ की सहायता से काव्यात्मक अनुवाद। कविता का अनुवाद करने में कई घंटो लगे। वो इसलिए कि अनुवाद में अनवादक भी होता है और उसकी काव्यात्मक समझ भी। साथ ही उसे सिर्फ़ शब्दों को नहीं कवि को भी पकड़ना है और कविता को भी और उस भाषा को भी जि...

अदृश्य

अदृश्य  रिश्तों का रस्सी न होना, अदृश्य होना, होना-सा भी न होना— होता है। दिखने की ज़िद नहीं होते रिश्ते, सिर्फ़ हलफ़नामे करते हैं ऐसा, करारनामे करते हैं— संशय को मुहरबंद करके। वे पढ़ सकते हैं, वे अनपढ़ होते हैं आत्माओं के बोझ का एल्जब्रा। वे पकड़ सकते हैं मुट्ठियों की रेत में महाद्वीपों की दूरियाँ, और टूट जाते हैं अहसासों के एक ग्राम वज़न से… …जुड़ने के लिए कभी आँसुओं से, कभी एक प्यार-भरी नज़र से, या शरीर की आँच से— बिना पिघले। न कोई गिरह, न कोई गाँठ, बस एक अदृश्य आकाश-सा विश्वास। — नरेन्द्र हसन काशवी